कविता : "बस ! आत्महत्या "
(आत्महत्या जितना भारी शब्द हैं , उतना ही भारी बोझ लिए रहता है। जीवन एक युद्धक्षेत्र है और हम उसके योद्धा , अगर मुश्किलों को देख , हार मान ले, तो मौत हर पल तैयार है हमें निगलने के लिए। वास्तव में कठिन परिस्थिति हर एक मनुष्य के जीवन की सच्चाई है , जो उस वक़्त संयम और समझ - बूझ के साथ काम लेता है उसे आत्महत्या जैसी कायरता कभी छू भी नहीं पाएगी। लेकिन एक सच्चाई यह भी है की आत्महत्या करने के लिए असीम ताक़त की आवश्यकता होती है अर्थार्त वह वक्ति मुश्किलों का सामना करने के लिए बलवान है। किन्तु फिर भी जीवन त्यागना ही एक मात्र विकल्प क्यों ? ईश्वर ने सबकी जन्म और मृत्यु सुनिश्चित की है फिर स्वयं इसका फैसला क्यों? इस कविता के पीछे मेरा उद्देश्य है की सबको मनुष्य जीवन नहीं मिलता और हमें इसका सम्मान करना चाहिए। कठिन समय केवल धैर्य और कर्म से पार किया जा सकता है , आत्महत्या तो जीवन के हर सुखद पहलु की भी हत्या कर देता हैं। मेरा सविनय निवेदन है अगर ऐसी किसी परिस्थिति में आप या आपके जानने वाले फसें हो तो तीन बातों को याद रखे - ईश्वर आपके साथ है , समय हर पल का समाधान है और अपन...