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Showing posts from December, 2015

कविता : "मैं एक छोटी सी बात"

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( हमारी ज़िन्दगी में छोटी बातों का बड़ा योगदान होता हैं, चाहे वो नए आविष्कार के लिए हो या फिर परिवार में तकरार के लिए। इस कविता में मेरा गंतव् सामाजिक दृश्टिकोण से है जो रिश्तों में तनाव ले आता हैं और जब इसका हल निकलता है तो पता चलता है की कोई बात थी ही नहीं , मगर तब तक चीज़े बिगड़ चुकी होती हैं। पूरे कविता का सार अगर चार पंक्ति में लिखना हो तो ये कुछ ऐसा होगा : एक छोटी सी बात का बन गया बबाल , जीवन बीत ना जाए करते मलाल , इससे बचाव हैं जरुरी , समझ - बूझ की तैयारी कर लो पूरी। ) हूँ मैं एक छोटी सी बात , पर बदल लेती हूँ अपनी आकार , भूल मत करना समझ कर, कि मैं हूँ बेकार , कितने घरों को तोड़ा है हमने, कर के हुंकार , समझना ना सिर्फ हमें एक छोटी सी बात। मैं नहीं बोलती , मेरे लिए सब है बोलते , सब बोलों को जोड़ कर बनती हूँ मैं बड़ी सी बात , उम्र ना देखूं , ना ही देखूं घर का प्यार , एक पल में आँसूं दूँ और कर दूँ अपनों को तार - तार , समझ बूझ की ना होती है हथयार , छीन लेती हूँ , जब बनती हूँ मैं छोटी से बड़ी बात। फिर सब कोसे मुझको, क्यों मैं आई मिटाने ये प्यार , मैं...

कविता : " राह "

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(यह कविता राह पर लिखी  हुँ जिसका उद्देश्य आज के पीढ़ी को आईना दिखाना हैं। आत्महत्या कर वो युवा शक्ति को तार - तार कर रहे हैं , मुश्किलों से भागना रास्ता नहीं , हिम्मत कर के इसका सामना करना चाहिए क्योकि वही नए भारत का स्वरुप बदल सकते हैं। ऐसे में उन्हें नशाखोरी ,  सामाजिक कुरीतियों से दूर रहना चाहिए और नव भारत का दृढ संकल्प के साथ निर्माण करे।) मैं राह , मस्त चाल में चलता हूँ , किधर है जाना , ये सबको बतलाता हूँ , खुद में  मैं ऐसा  बनता हूँ , हर जगह घूम फिर कर आता हूँ, मैं ही राही को मंजिल तक पहुँचता हूँ। मैंने हँसकर सब से बोला , रोना कभी ना सीखा हैं , छूटा एक मंजिल , आगे कई राह मैंने सींचा हैं , कई है आए कई गए , इस पथ से ही सब गुजरे , चाहे गांधी , अकबर हो या कबीर , इसी राह से सबने बनाई हैं अपनी तक़दीर , हमने देखी खूने और तलवारे , हमने देखी अंग्रेज़ो की आत्याचारे , देखी हैं खून से सनी लोगों के शरीर , पर मार लिया मंन को , यह कह कर की यही थी उनकी तक़दीर , हमने देखी पुरानी और नई पीढ़ी , कैसे चढ़ी थी मानवो ने सारी सीढ़ी। मुझे बदला...

कविता : "भूले - बिसरे दोस्त"

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वक़्त और हैं , दौर और था , उस समय मैं  बच्ची थी, आज  बात और हैं।  लेकिन आज भी वही मासूम दिल लिए घूमते हैं , वही पहले वाली मुसकान बरक़रार हैं , कुछ भूली नहीं इस बात का फक्र नहीं , ख़ुशी इस बात की है - की तुम मुझे याद हो और मैं तुम्हे याद हूँ।  चलो एक बार फिर मिल ले गले , थोड़ा साथ हँस ले और थोड़ा रो ले , फिर गलती करे और कुछ नया सीख जाए , अंदर के बच्चे को फिर से जगाये , दोस्ती की बोतल चलो खोल ले की बहुत बातें अभी बाकी है , कि रातों को आज सोना नहीं और दिन भी हमारा गुलाम हैं , दोस्ती में यही तो ताकत है की किसी का इसको डर नहीं , सब का इसको सलाम हैं। कुछ भूली नहीं इस बात का फक्र नहीं , ख़ुशी इस बात की है - की तुम मुझे याद हो और मैं तुम्हे याद हूँ। आज तो अपने भी समझते नहीं , मुद्दे भी बे तोड़ हैं , अभी आतंकवाद ही सुलझा नहीं की हम रिश्तो में उलझे हैं , देश को लोग जात - पात के नाम पर बाँट रहे ,  हम तो अपनों  को ही एक करने में लगे हैं। इन सारी उलझन को एक बार भूला दे , दोस्तों के साथ चलो ग़म में भी मुस्कुरा ले , ऐ दोस्त ! फ़िर से मस...

Poem: "My Father…………My Dream!!"

(Parents play a very important role in making you. Adoring them for a day in the form of celebrating Father’s day or Mother’s day shows how superficial we are. Celebrating days for them will value, only when we understand the true values and pain of parenting. I saw the movie Piku, inspite many things were irritating about her father but she cared for her because she knew its age effect. Love and responsibility could never be defined. No one knows from where it should be started and where it will end.) The spirit of effort that you have given me, it’s proud to tell that you are my father; The dream that you have given me, it’s proud to tell that you are my father; I wish to join both spirited effort and dream that you have given me, thou say once, ‘I am proud to be your father’; Sometimes I get disheartened on my failure, but you hold my hand and walk further; Thank you for the support that you have given me, it’s proud to tell that you are my father; The ...