कविता : "मेरे साथ क्यों ?"

(बढ़ती जनसंख्या और घटता स्त्री - पुरुष अनुपात एक जानी पहचानी समस्या  है। इस विराट भारत की एक और कहानी है , बलात्कार की जो आज आये दिन अखबारों में पढ़ने को मिल जाएगी । ये कैसी मानशिक प्रवृति है जो औरत को मनुष्य नहीं केवल वस्तु मात्र समझता है। इस अभर्द्र और घिनौने अपराध में बच्चे , बूढ़े , जवान , अपंग, इत्यादि सभी उम्र की लड़कियाँ शिकार होती रहती है। आवाज़ उठाने के बावजूद समय पर सभी को न्याय नहीं मिल पाता किन्तु उनके अंदर हो रही हलचल, भय , पीड़ा के बारे में किसीको मालूम नहीं पड़ता।  ये कविता  उनके अंदर उठ रहे कई सवालो को शब्दों में पिरोने की छोटी प्रयास  मात्र है। )


किस  बात की पुकार है ,
कैसा ये हाहाकार है ,
मिट गया है वजूद मेरा , नहीं कुछ  भी बाकी है ,
पूछता मेरा मन सिर्फ एक सवाल हैं , "मेरे साथ क्यों ?"

दर्द की तूफ़ान में , दबी दबी सी रात है ,
दिन की रोशनी में भी , चुभती हुई सी बात हैं ,
कभी - कभी चिल्ला उठूँ , कभी - कभी घबराती हूँ ,
आज़ तो खुद के साये से भी डर जाती हूँ। 
कि एक ऐसी आंधी आई क्यों ? मैं औरत हूँ क्यों ?
पूछता मेरा मन सिर्फ एक सवाल हैं , "मेरे साथ क्यों ?"

खिली खिली सी बात थी मेरी, घर के हर कोनो में मेरी ही आवाज़ थी ,
मेरा दिन , मेरी रात थी ,
बेखौफ मन नाचता था , मोरनी सी चाल थी ,
मैं सुन्दर थी , इस बात का क्यों गुमान था। 
फिर एक ऐसी रात छायी की फिर खिल न सकी ,
मैं भी उड़ना चाहती थी , मुझे दबाया क्यों ,
पूछता मेरा मन सिर्फ एक सवाल हैं , "मेरे साथ क्यों ?"

कि सिसक , सिसक कर रोती हूँ ,
कि  फिर ना कभी पहले जैसी उड़ पाऊँगी ,
मैं औरत हूँ , इस दर्द के साथ मैं घूट जाऊंगी ,
अभी भी कई घाव है मेरे जिस्म में , जो वक़्त के साथ मिट जायेंगे ,
मगर एक घाव जो आत्मा को लगा हो , क्या वो कभी समिट पाएंगे,
दर्द की रात आज भी याद आती है मुझको ,
चिल्ला उठता है मन , खौफ की चादर आज भी ढक लेती है समूचे तन को। 

बेबस हूँ , लाचार हुँ , समझा मुझे ज़माने ने ,
चलती गुड़िया समझ कर , तोड़ डाला मुझे आज़माने में ,
पर जान अब भी बाकी है , मैं जीना अब भी चाहती हूँ ,
फिर समय बीतेगा , फिर हसने की बात होगी, पर क्या मैं वापस "मैं" हो पाऊँगी ,
पूछता मेरा मन सिर्फ एक सवाल हैं , "मेरे साथ क्यों ?"







Comments

  1. Replies
    1. प्रयास अच्छा है समाज को आईनी दिखाने का, पर हिम्मत और हुनर के सहारे इन कठिनाइयों से निपटा जा सकता है ।

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    2. Thank you papa :-) you are right but it won't eradicate until and unless each one of the citizen of India perform their true duty.

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