कविता : "वाह पैसा !!"
पैसे की हाय कैसी कहानी ,
जिसके पास जितनी ,
उसने उतनी है चाही ,
पैसे की हाय कैसी कहानी।
पैसे ने है बांटा इंसान को ,
आँगन को , घर - बार को ,
यहाँ तक ना छोड़ा सन्तान को ,
पैसे ने इंसान को शैतान बनाया ,
हाथों में खंजर और पुण्य धरती को क़ब्रिस्तान बनाया।
पैसे की हाय कैसी कहानी ,
जिसके पास जितनी ,
उसने उतनी है चाही।
मित्र ने मित्र को लूटा ,
नौकर से ना मालिक छूटा ,
आतंक की ये कैसी घनघोर छाया ,
जाने इस पैसे की क्या है माया ,
पैसे की ये रीत पुरानी ,
ना इसकी माया कैकई समझी और ना ही दुर्योधन ने जानी ,
यही स्वरुप समाज बदला ,
देख कर पानी खुद को दलदल में धकला।
पैसे की हाय कैसी कहानी।
पैसे बनाने की होर में लगे हम ,
जन्मे ना जाने कितने मुजरिम ,
भ्रष्टाचार , दहेज़ है इसी का परिणाम ,
जो आज कर रहे इंसानियत को बदनाम ,
और ना जाने कितनी है इसकी जन्मकुंडली ,
सब लिखने बैठूं तो कागज़ भी पर जाए बिकनी।
पैसे की हाय कैसी कहानी ,
जिसके पास जितनी ,
उसने उतनी है चाही।
पर इसे हँसी में मत उड़ाना ,
ए मेरे दोस्त ! मेरी विचार समझना ,
पैसे ने दिया ही क्या ,
खुशियाँ या गम का दिया ,
तुझपर छोड़ूँ तेरी व्यथा ,
पर झूठी नही है पैसे की ये कथा।
पैसे की हाय कैसी कहानी ,
जिसके पास जितनी , उसने उतनी है चाही।
जो राम कृष्ण को भुलाएं ,
इंसान को इंसान से लड़ाएं ,
पर एक प्रश्न मुझे हमेशा से सताए ,
कि पैसे की महत्ता हममें कौन जगाए ?
पैसे की हाय कैसी कहानी ,
जिसके पास जितनी ,
उसने उतनी है चाही।
जिसके पास जितनी ,उसने उतनी है चाही ,
पैसे की हाय कैसी कहानी।
पैसे ने है बांटा इंसान को ,
आँगन को , घर - बार को ,
यहाँ तक ना छोड़ा सन्तान को ,
पैसे ने इंसान को शैतान बनाया ,
हाथों में खंजर और पुण्य धरती को क़ब्रिस्तान बनाया।
पैसे की हाय कैसी कहानी ,
जिसके पास जितनी ,
उसने उतनी है चाही।
मित्र ने मित्र को लूटा ,
नौकर से ना मालिक छूटा ,
आतंक की ये कैसी घनघोर छाया ,
जाने इस पैसे की क्या है माया ,
पैसे की ये रीत पुरानी ,
ना इसकी माया कैकई समझी और ना ही दुर्योधन ने जानी ,
यही स्वरुप समाज बदला ,
देख कर पानी खुद को दलदल में धकला।
पैसे की हाय कैसी कहानी।पैसे बनाने की होर में लगे हम ,
जन्मे ना जाने कितने मुजरिम ,
भ्रष्टाचार , दहेज़ है इसी का परिणाम ,
जो आज कर रहे इंसानियत को बदनाम ,
और ना जाने कितनी है इसकी जन्मकुंडली ,
सब लिखने बैठूं तो कागज़ भी पर जाए बिकनी।
पैसे की हाय कैसी कहानी ,
जिसके पास जितनी ,
उसने उतनी है चाही।
पर इसे हँसी में मत उड़ाना ,
ए मेरे दोस्त ! मेरी विचार समझना ,
पैसे ने दिया ही क्या ,
खुशियाँ या गम का दिया ,
तुझपर छोड़ूँ तेरी व्यथा ,
पर झूठी नही है पैसे की ये कथा।
पैसे की हाय कैसी कहानी ,
जिसके पास जितनी , उसने उतनी है चाही।
जो राम कृष्ण को भुलाएं ,
इंसान को इंसान से लड़ाएं ,
पर एक प्रश्न मुझे हमेशा से सताए ,
कि पैसे की महत्ता हममें कौन जगाए ?
पैसे की हाय कैसी कहानी ,
जिसके पास जितनी ,
उसने उतनी है चाही।
Ever wonder "where all money come from and where all does it go".A strange fact is that 99.9% people on earth who are running for money donot know anything about money printing mechanism. How central bank around the world creates money & what happens to all those money. Also everyone is running after money trying to accumulated as much as they can , as it will provide moksha. Strangely nobody remembers the rich , most people don't know who was the richest person 50 year back or a century ago.
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